मानसिक विकास का अर्थ तथा शैक्षिक उपयोगिता

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मानसिक विकास का अर्थ तथा शैक्षिक उपयोगिता : जब बच्चा बड़ा होता है, जैसे-जैसे वह वृद्धि करता है उसकी शारीरिक एवं संवेगात्मक विकास करने लगता है और साथ ही साथ बच्चे में बौद्धिक तथा मानसिक विकास भी होने लगता है। इस प्रकार से बालक में सोचने समझने की शक्ति का विकास होता है। जैसे जैसे वो बड़ा होता है वैसे बहुत से प्रश्नों को पूछना शुरु कर देता है और उसमें तर्क शक्ति का विकास होने लगता है तथा शरीर विकास के साथ साथ मानसिक विकास भी होना शुरू हो जाता है।

शिक्षा में मानसिक विकास का उपयोग : शिक्षा बच्चों के मानसिक विकास में बहुत ही उपयोगी है –

  1. शिक्षा में प्रवृत्तियों का प्रयोग: माता पिता और अध्यापकों को बच्चों में होने वाली प्रवृत्तियों का उपयोग करना चाहिए जो है। 
  2. अच्छी वस्तुओं का संग्रह करना: माता पिता और अध्यापकों को ध्यान देना होगा कि वह बच्चों में अच्छी आदतों का उत्पादन कराएं जैसे वह बच्चों को टिकट संग्रह करना सिखाए और वह उन्हें सिक्के फोटोग्राफ और उतम पुस्तके एकत्र करने की प्रेरणा दे सकते हैं।
  3. जिज्ञासा की प्रवृत्ति: अध्यापक और माता पिता को ध्यान देना होगा कि बच्चों में जो जिज्ञासा की प्रवृत्ति उत्पन्न हो रही है उसे उस जिज्ञासा के लिए पूरा सहयोग करें जैसे कि बच्चों को प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करें और अध्यापक का कर्तव्य है वह बच्चों को प्रत्येक प्रकार का ज्ञान देने की कोशिश करें जिससे उसकी ज्ञान प्राप्ति हो और वो शिक्षा प्राप्ति के कार्य में सक्रिय होकर भाग ले और जिसे से बच्चों का समुचित मानसिक विकास हो पाएगा।
  4. रचना की प्रवृत्ति: आप सभी ने जरूर देखा होगा बच्चे अक्सर वस्तुओं को जोड़ते तथा तोड़ते रहते हैं यह उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति है इसके लिए विद्यालय में कला तथा शिल्प विभाग होना चाहिए जहां बच्चों को विभिन्न तकनीकी शिक्षा दी जाए इस से बच्चों को कुछ ना कुछ सीखने को प्राप्त होगा
  5. सामाजिक प्रवृत्ति: माता पिता तथा अध्यापकों को सामाजिक प्रवृत्ति का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए बच्चों को स्काउटिंग,गर्ल्स गाइड,एन एस एस इन तीन खेलों में भाग लेने के लिए उत्साहित करना चाहिए  यह क्रियाएँ बच्चों में सहयोग नेतृत्व न्याय देश प्रेम विनम्रता समाज सेवा आदि गुणों को विकसित करेंगे।
  6. अध्यापक और माता पिता का कर्तव्य है वास्तविक पदार्थों द्वारा शिक्षण देना: छोटे बच्चों को ठोस पदार्थ लकड़ी या प्लास्टिक से बने ब्लॉकों द्वारा औपचारिक शिक्षा दी जानी चाहिए इस प्रकार की शिक्षा बच्चे के मानसिक विकास  मे अत्यधिक सहायता होगी।
  7. स्नेह तथा प्रेम का वातावरण: अध्यापक और माता पिता को जरूरी है बच्चों को स्नेह तथा प्रेम का वातावरण देना चाहिए उन्हें बच्चों के साथ स्नेह पूर्वक एवं सहानुभूतिपूर्वक ढंग से व्यवहार करना चाहिए इसे ना केवल बच्चों का मानसिक विकास होगा बल्कि उसके व्यक्तित्व का भी विकास होगा।
  8. अच्छे उदाहरण प्रस्तुत करें: यह बहुत जरूरी होता है अध्यापक और माता पिता को बच्चे के सामने एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करें ताकि बच्चे उन से प्रेरित हो यदि माता पिता और अध्यापक स्वयं सत्यवादी ईमानदार तथा अनुशासनप्रिय होंगे तो बच्चे भी सत्यवादी ईमानदार तक अनुशासनप्रिय होंग।

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  2. समावेशी शिक्षा ( Inclusive Education ) 
  3. विकास के सिद्धांत – (Principles of Development )
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